जांच मनरेगा में मजदूरी कम है या काम
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में मानव दिवस लगातार कम होते जा रहे हैं। क्यों! इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए भारत सरकार की टीम ग्राम पंचायतों में जांच-पड़ताल कर रही है। गुरुवार को खजुरी में तीन सदस्यीय टीम ने नायाब तरीके से जांच की। यह जानने की कोशिश की मजदूरी कम है या काम की गति धीमी है। टीम ने मजदूरों की टोलियां बनवा दी और 4 घंटे अलग-अलग काम कराया। मजदूरों के कार्य की रिपोर्ट तैयार की।
ग्राम पंचायतों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में मानव दिवस लगातार कम होते जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों में काम की गति धीमी पड़ती जा रही है। शासन से आवंटित धन बचा रह जा रहा है। काम की इस धीमी गति की वजह मनरेगा मजदूर कम मजदूरी बता रहे हैं। वहीं ग्रामीण और कुछ जिम्मेदार तर्क दे रहे हैं कि काम के हिसाब से दाम ठीक पा रहे हैं। अब भारत सरकार ने घटते मानव दिवसों की सचाई जानने के लिए जांच-पड़ताल शुरू करा दी है। विशेष टीमें हर ब्लाक में किसी न किसी गांव में जा रही है और मनरेगा के तहत हो रहे विकास कार्यों का मूल्यांकन कर रहे हैं।
भारत सरकार की एक विशेष टीम गुरुवार को सहजनवां विकास खंड के ग्राम पंचायत खजुरी में पहुंची थी। खजुरी गांव में बसंती माई पोखरे का सौंदर्यीकरण हो रहा है। भारत सरकार की विशेष टीम में तीन सदस्य इंजीनियर रवींद्र कुमार, सद्दाम खां और शबीउलहादो शामिल थे। टीम के साथ ही खंड विकास अधिकारी सहजनवां बेचन राम, एपीओ संतोष कुमार शुक्ला, ग्राम पंचायत अधिकारी अभय कुमार तकनीकी सहायक अजीत कुमार सिंह,ब्लाक टीए मनीष भाटिया और ग्राम रोजगार सेवक स्नेहलता सिंह मौजूद थे।
पोखरे की खुदाई कर रहे मजदूरों की बना दी टोलियां
खजुरी गांव में जांच-पड़ताल करने पहुंची टीम ने पोखरे की खुदाई कर रहे मजदूरों को एक जगह बुलाया और उनकी अलग-अलग टोलियां बना दी। टीम ने सभी महिलाओं की एक टोली बनाई जबकि युवाओं की दूसरी टोली। 55 की उम्र पार मजदूरों की तीसरी टोली बना दी। तीनों टोलियों को थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लगा दिया। मजदूरों ने लगाता चार घंटे तक पोखरे की खुदाई की। इसके बाद उन्हें हटा दिया गया। जांच कर रही टीम के सदस्यों ने तीनों टोलियों द्वारा की गई खुदाई की माप की और रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद टीम के सदस्य वहां से लौट गए। मजदूर अपने-अपने काम में जुट गए।
गांवों से पलायन रोकने के लिए लागू हुई थी मनरेगा
गांवों से तेजी से हो रहे युवाओं की शहरों की तरफ पलायन रोकने के लिए सरकार ने मनरेगा शुरू की थी। ग्रामीण युवाओं को गांव में ही रोजगार मिलने लगा था। बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़े। जॉब कार्ड हासिल किया और काम में लग गए। मानव दिवस बढ़ने लगा और विकास तथा निर्माण कार्य भी तेज हो गया। इसकी वजह से मजदूरी भी बढ़ गई। मनरेगा में मजदूरी 182 रुपये तय है। वहीं कहीं और काम कर रहे मजदूर 300 से 500 रुपये दिहाड़ी कमाने लगे हैं। इसी वजह से मनरेगा में मानव दिवस घटने लगा है।
मजदूरों द्वारा शिकायतें की जाती रही है कि उनकी मजदूरी काफी कम है। मनरेगा में जो मजदूरी मिलती है उसकी तुलना में अन्यत्र काम करने पर ज्यादा मजदूरी मिलती है। टीम यह जांचने के लिए पहुंची है कि एक मजदूर को एक दिन में कितना काम करना चाहिए मनरेगा मजदूर उतना कर रहे हैं कि नहीं। काम के सापेक्ष उनकी मजदूरी ठीक है या नहीं।
बेचन राम